BAJARANG BAAN KE SIDH ACHUK PRAYOG श्री बजरंग बाण का अचूक प्रयोग

 श्री बजरंग बाण का अचूक प्रयोग

 

श्री बजरंग बाण प्रयोग

BAJARANG BAAN KE SIDH ACHUK PRAYOG श्री बजरंग बाण का अचूक प्रयोग



दैहिक, दैविक और भौतिक समस्याओं से मुक्ति के लिये बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिये किया जाता है |

पवनपुत्र और श्रीराम के परम सेवक हनुमान जी से अगर कोई वरदान पाना हो तो आपको इसके लिए सबसे पहले श्रीराम का नाम लेना होगा | अगर इतने से भी काम बने तो आप हनुमान जी को श्रीराम के नाम की सौगंध दे दीजिये | बस फिर देखिये कि कैसे नहीं बनते आपके बिगड़े काम | जीवन की 8 ऐसी समस्याओं की जिनका समाधान सिर्फ और सिर्फ बजरंगबाण के पास ही है | बस इसके लिए आपको अलग अलग तरीके से बजरंगबाण का पाठ करना होगा |     

 

 

बजरंगबाण से विवाह बाधा खत्म

कदली वन, या कदली वृक्ष के नीचे बजरंग बाण का पाठ करने से विवाह की बाधा खत्म हो जाती है | यहां तक कि तलाक जैसे कुयोग भी टलते हैं बजरंग बाण के पाठ से |

 

बजरंग बाण से ग्रहदोष समाप्त

अगर किसी प्रकार के ग्रहदोष से पीड़ित हों, तो प्रात:काल बजरंग बाण का पाठ, आटे के दीप में लाल बत्ती (कलावा) जलाकर करें | ऐसा करने से बड़े से बड़ा ग्रह दोष पल भर में टल जायेगा |

 

साढ़ेसाती-राहु से नुकसान की भरपाई

 

अगर शनि,राहु,केतु जैसे क्रूर ग्रहों की दशा,महादशा चल रही हो तो उड़द दाल के 21 या 51 बड़े एक धागे में माला बनाकर चढ़ायें | सारे बड़े प्रसाद के रुप में बांट दें | आपको तिल के तेल  का दीपक जलाकर सिर्फ 3 बार बजरंगबाण का  पाठ करना होगा |

 

बजरंगबाण से कारागार से मुक्ति

 

अगर किसी कारणवश जेल जाने के योग बन रहे हों, या फिर कोई संबंधी जेल में बंद हो तो उसे मुक्त कराने के लिए हनुमान जी की पूंछ पर सिंदूर से 11 टीका लगाकर 11 बार बजरंग बाण पढ़ने से कारागार योग से मुक्ति मिल जाती है | अगर आप हनुमान जी को 11 गुलाब चढ़ाते हैं या फिर चमेली के तेल में 11 लाल बत्ती के दीपक जलाते हैं तो बड़े से बड़े कोर्ट केस में भी आपको जीत मिल जायेगी |

 

सर्जरी और गंभीर बीमारी टाले बजरंग बाण

 

कई बार पेट की गंभीर बीमारी जैसे लीवर में खराबी, पेट में अल्सर या कैंसर जैसे रोग हो जाते हैं, ऐसे रोग अशुभ मंगल  की वजह से होते हैं | अगर इस तरह के रोग से मुक्ति पानी हो तो हनुमान जी को 21 पान के पत्ते की माला चढ़ाते हुए 5  बार बजरंग बाण पढ़ना चाहिये | ध्यान रहे कि बजरंगबाण का पाठ राहुकाल में ही करें | पाठ के समय घी का दीप ज़रुर  जलायें |

 

छूटी नौकरी दोबारा दिलाए बजरंग बाण

 

अगर नौकरी छूटने का डर हो या छूटी हुई नौकरी दोबारा पानी हो तो बजरंगबाण का पाठ रात में   नक्षत्र दर्शन करने के  बाद करें | इसके लिए आपको मंगलवार का व्रत भी रखना होगा | अगर आप हनुमान जी को नारियल चढ़ाने के बाद,  उसे लाल कपड़े में लपेट कर घर के आग्नेय कोण रखते हैं तो मालिक स्वयं आपको नौकरी देने सकता है  |

 

वास्तुदोष दूर करे बजरंगबाण

 

कई बार घर में वास्तुदोष के चलते कई समस्या हो जाती है | तो घर में वास्तुदोष दूर करने के लिए 3 बार बजरंगबाण का  पाठ करना चाहिए | हनुमान जी को लाल झंडा चढ़ाने के बाद उसे घर के दक्षिण दिशा में लगाने से भी वास्तुदोष से मुक्ति  मिलती है | घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा घर के मुख्य द्वार पर लगायें |

 

बजरंग बाण से दवा असर करे

 

कई बार गंभीर बीमारी में दवा फायदा नहीं करती | दवा फायदा करे इसके लिए 2 बार बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए | साथ ही साथ संजीवनी पर्वत की रंगोली बनाकर उस पर तुलती के 11 दल चढ़ाने से दवा धीरे धीरे असर करने लगती है |

 

 

श्री बजरंग बाण प्रयोग

इसके लिए मंगलवार अथवा शनिवार का दिन चुन लें |

हनुमानजी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें |

ऊनी अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें | अनुष्ठान के लिये शुद्ध स्थान तथा शान्त वातावरण आवश्यक है |

घर में यदि यह सुलभ हो तो कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें |
हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है | पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें | अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ |

दीपक की बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें | इस धागे को पाँच बार मोड़ लें | इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें |

समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए |

हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें |

जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे |

अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें |

||श्रीराम–|| से लेकर ||–सिद्ध करैं हनुमान|| तक एक बैठक में ही इसकी एक माला (108 पाठ) जप करनी है |

गूगुल की सुगन्धि देकर जिस घर में बजरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट ही नहीं पाते |

समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए |

 

बजरंग ध्यान

 

श्रीराम
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं |
दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम् | |
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं |
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि | |

 

 

श्री बजरंग बाण

 

 ||दोहा ||

 

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,  बिनय करै सनमान |

तेहि के कारज सकल शुभसिद्ध करै हनुमान ||

 

जो भी राम भक्त श्री बजरंग बलि हनुमान के सामने संकल्प लेकर पूरी श्रद्धा प्रेम से उनसे प्रार्थना करता है श्री हनुमान उनके सभी कार्यों को शुभ करते हैं |

 

 

 

 ||चौपाई ||

 

जय हनुमन्त सन्त हितकारी |

सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी ||

जन के काज विलम्ब कीजै |

आतुर दौरि महा सुख दीजै ||

 

 

हे संतों का कल्याण करने वाले श्री हनुमान आपकी जय हो, हे प्रभु हमारी प्रार्थना सुन लिजिए | हे बजरंग बली वीर हनुमान अब भक्तों के कार्यों को संवारने में देरी करें सुख प्रदान करने के लिए जल्दी से आइये |

 

 

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा |

सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ||

आगे जाय लंकिनी रोका |

मारेहु लात गई सुर लोका ||

जाय विभीषण को सुख दीन्हा |

सीता निरखि परम पद लीन्हा ||

बाग उजारि सिन्धु महं बोरा |

अति आतुर यम कातर तोरा ||

अक्षय कुमार मारि संहारा |

लूम लपेटि लंक को जारा ||

लाह समान लंक जरि गई |

जय जय धुनि सुर पुर महं भई ||

 

 

हे बजरंग बलि जैसे आपने कूद कर सागर को पार कर लिया था | सुरसा जैसी राक्षसी ने अपने विशालकाय शरीर से आपको लंका जाने से रोकना भी चाहा, लेकिन जिस तरह आपने उसे लात मार कर देवलोक पंहुचा दिया था | जिस तरह लंका जाकर आपने विभिषण को सुख दिया | माता सीता को ढूंडकर परम पद की प्राप्ति की | आपने रावण की लंका के बाग उजाड़े और आप रावण के भेजे सैनिकों के लिए यम के दूत बने | जितनी तेजी से आपने अक्षय कुमार का संहार किया, जैसे आपने अपनी पूंछ से लंका को लाख के महल के समान जला दिया जिससे आपकी जय जयकार सुर पुर यानि स्वर्ग में होने लगी |

 

 

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी |

कृपा करहुं उर अन्तर्यामी ||

जय जय लखन प्राण के दाता |

आतुर होइ दु: करहुं निपाता ||

जय गिरिधर जय जय सुख सागर |

सुर समूह समरथ भटनागर ||

हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले |

बैरिहिं मारू बज्र की कीले ||

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो |

महाराज प्रभु दास उबारो ||

 

हे स्वामी अब किस कारण आप देरी कर रहे हैं, हे अंतर्यामी कृपा कीजिये | भगवान राम के भ्राता लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले हे बजरंग बलि हनुमान आपकी जय हो | मैं बहुत आतुर हूं, आप मेरे कष्टों का निवारण करें | हे गिरिधर (पहाड़ को धारण करने वाला) सुख के सागर बजरंग बलि आपकी जय हो | सभी देवताओं सहित स्वयं भगवान विष्णु जितना सामर्थ्य रखने वाले पवन पुत्र हनुमान आपकी जय हो | हे परमेश्वर रुपी हठीले हनुमान बज्र की कीलों से शत्रुओं पर प्रहार करो | अपनी बज्र की गदा लेकर बैरियों का विनाश करो | हे बजरंग बलि महाराज प्रभु इस दास को छुटकारा दिलाओ |

 

 

ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो |

बज्र गदा हनु विलम्ब लावो ||

ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा |

हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ||

सत्य होउ हरि शपथ पायके |

रामदूत धरु मारु धाय के ||

जय जय जय हनुमन्त अगाधा |

दु: पावत जन केहि अपराधा ||

 

 

हे वीर हनुमान ओंकार की हुंकार भरकर अब कष्टों पर धावा बोलो अपनी गदा से प्रहार करने में विलंब करें | हे शक्तिमान परमेश्वर कपीश्वर बजरंग बलि हनुमान | हे परमेश्वर हनुमान दुश्मनों के शीश धड़ से अलग कर दो | भगवान श्री हरि खुद कहते हैं कि उनके शत्रुओं का विनाश रामदूत बजरंग बलि हनुमान तुरंत आकर करते हैं | हे बजरंग बलि मैं आपकी दिल की अथाह गहराइयों से जय जयकार करता हूं लेकिन प्रभु आपके होते हुए लोग किन अपराधों के कारण दुखी हैं |

 

 

पूजा जप तप नेम अचारा |

नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ||

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं |

तुमरे बल होऊं डरपत नाहीं ||

पाय परौं कर जोरि मनावों |

यही अवसर अब केहि गोहरावों ||

जय अंजनि कुमार बलवन्ता |

शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ||

 

हे महावीर आपका ये दास पूजा, जप, तप, नियम, आचार कुछ भी नहीं जानता, जंगलों में, उपवन में, रास्ते में, पहाड़ों में या फिर घर पर कहीं भी आपकी कृपा से हमें डर नहीं लगता | हे प्रभु मैं आपके चरणों में पड़कर अर्थात दंडवत होकर या फिर हाथ जोड़कर आपको मनाऊं | इस समय मैं किस तरह आपकी पुकार लगाऊं हे अंजनी पुत्र, हे भगवान शंकर के अंश वीर हनुमान आपकी जय हो |

 

 

बदन कराल काल कुल घालक |

राम सहाय सदा प्रतिपालक ||

भूत प्रेत पिशाच निशाचर |

अग्नि बैताल काल मारीमर ||

इन्हें मारु तोहि शपथ राम की |

राखु नाथ मरजाद नाम की ||

जनकसुता हरि दास कहावो |

ताकी शपथ विलम्ब लावो ||

जय जय जय धुनि होत अकाशा |

सुमिरत होत दुसह दु: नाशा ||

चरण शरण करि जोरि मनावों |

यहि अवसर अब केहि गोहरावों ||

 

हे वीर हनुमान आपका शरीर काल के समान विकराल है | आप सदा भगवान श्री राम के सहायक बने सदा उनके वचन की पालना की है | भूत, प्रेत, पिशाच रात्रि में घूमने वाली दुष्ट आत्माओं को आप अपनी अग्नि से भस्म कर देते हैं | आपको भगवान राम की शपथ है इन्हें मारकर भगवान राम अपने नाम की मर्यादा रखो स्वामी | आप माता सीता के भी दास कहलाते हैं आपको उनकी भी कसम हैं इस कार्य में देरी करें | आकाश में भी आपकी जय जयकार की ध्वनी सुनाई दे रही है | आपके स्मरण से दुष्कर कष्टों का भी नाश हो जाता है | आपके चरणों की शरण लेकर हाथ जोड़कर आपसे विनती है प्रभु, आपको किस तरह पुकारुं, मेरा पथ-प्रदर्शन करें, मुझे राह सुझाएं मैं क्या करुं |

 

उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई |

पांय परौं कर जोरि मनाई ||

चं चं चं चं चपल चलन्ता |

हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ||

हं हं हांक देत कपि चञ्चल |

सं सं सहम पराने खल दल ||

 

हे वीर हनुमान आपको भगवान श्री राम की दुहाई है उठकर चलो आपके पांव गिरते हैं आपके सामने हाथ जोड़ते हैं | हे सदा चलते रहने वाले हनुमान ऊँ चं चं चं चं चले आओ | ऊँ हनु हनु हनु हनु श्री हनुमान चले आओ | ऊँ हं हं हे वानर राज आपकी हुंकार से राक्षसों के दल सहम गए हैं, भयभीत हो गए हैं ऊँ सं सं |

 

अपने जन को तुरत उबारो |

सुमिरत होय आनन्द हमारो ||

यहि बजरंग बाण जेहि मारो |

ताहि कहो फिर कौन उबारो ||

पाठ करै बजरंग बाण की |

हनुमत रक्षा करै प्राण की ||

यह बजरंग बाण जो जापै |

तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे ||

धूप देय अरु जपै हमेशा |

ताके तन नहिं रहे कलेशा ||

 

हे बजरंग बलि श्री हनुमान अपने भक्तजनों का तुरंत कल्याण करो | आपके सुमिरन से हमें आनंद मिले | जिसको यह बजरंग बाण लगेगा फिर उसका उद्धार कौन कर सकता है | जो इस बजरंग बाण का पाठ करता है श्री हनुमान स्वयं उसके प्राणों की रक्षा करते हैं | जो भी इस बजरंग बाण का जाप करता है, उससे भूत-प्रेत सब डरकर कांपने लगते हैं | जो बजरंग बलि महावीर हनुमान को धूप आदि देकर बजरंग बाण का जाप करता है उसे किसी प्रकार कष्ट नहीं सताता |

 

 ||दोहा ||

 

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,  सदा धरै उर ध्यान |

तेहि के कारज सकल शुभ,  सिद्ध करै हनुमान ||

 

जो प्रेम से महावीर श्री हनुमान का भजन करता है अपने हृद्य में सदा उनको धारण किये रहता है उनके सारे कार्यों को स्वयं हनुमान सिद्ध करते हैं | बजरंग बान अपने आप में ही एक शाबर मन्त्र है

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