Anulom Vilom, Steps And Benefits| क्या हैं अनुलोम विलोम प्राणयाम के फायदे, कैसे करें प्राणायाम स्टेप बाई स्टेप

अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नासिका या नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है-नाक का बायां छिद्र। अर्थात अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम को कुछ योगीगण 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहते है। उनके अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी वे स्वच्छ व निरोग बनी रहती है। इस प्राणायाम के अभ्यासी को वृद्धावस्था में भी गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें नहीं होतीं।

Anulom Vilom, Steps And Benefits| क्या हैं अनुलोम विलोम प्राणयाम के फायदे, कैसे करें प्राणायाम स्टेप बाई स्टेप


अनुलोम-विलोम प्राणायाम Anulom Vilom Pranayam

योग के फायदे जान कर लोग अब इसकी तरफ बढ़ रहे हैं| कुछ लोग तो ऐसे हैं जो जिम छोड़कर योगा को अपना रहे हैं|  लोगों का मानना है कि जिम से शरीर के किसी खास अंग की ही एक्सरसाइज हो पाती है, लेकिन योग से बॉडी के सारे पार्ट्स की एक्सरसाइज हो जाती है|  इस कारण जिम में पसीना बहाने से बेहतर है कि आप घर बैठे अपना समय भी बचाए और बिना किसी तकलीफ के बेहतर शरीर भी पा सकें|  इन्हीं में से एक है अनुलोम विलोम प्रणायाम (Anulom Vilom in Hindi) | अनुलोम विलोम कई रोगों से लड़ने में कारगर माना जाता है| अस्थमा पीडि़त इस आसन से लाभ पा सकते हैं| तो चलिए आज आपको बताते हैं अनुलोम विलोम के फायदों (Anulom Vilom Benefits) के बारे में और इसे करने के सही तरीके की जानकारी देते हैं| योग करने से आपके शरीर का डाइजेशन भी सही रहता है और शरीर तभी फिट रह सकता है जब आपकी बॉडी का डाइजेशन सही हो| योग करने से आपको समय पर भूख लगती है और समय पर खाना खाने आपका डाइजेशन भी बेहतर बना रहता है| अपने आपको फिट रखने के लिए आप  कई तरह के योगासन कर सकते हैं, लेकिन कहा जाता है कि प्राणायाम के ढ़ेरों फायदे हैं| प्राणायाम करने से दमा, एलर्जी, साइनोसाइटिस,पुराना नजला, जुकाम आदि रोगों से निजात पाया जा सकता है| तो चलिए आज आपको बताते हैं योग के फायदों के बारे में- 

कैसे करें अनुलोम विलोम प्राणायाम स्टेप बाई स्टेप How to Do Anulom Vilom 

अनुलोम विलोम कई रोगों से लड़ने में कारगर माना जाता है| 

1. सबसे पहले चौकड़ी मार कर बैठें|
2. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए|
3. अब अनामिका अंगुली से बाई नासिका को बंद कर दें| 
4. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें|
5. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड दें|
नोट- दूसरी बार में आप जिस नासिका से सांस छोड़ रहे हैं उसी से दोबारा सांस को अंदर लेकर दूसरी नासिका से छोड़ना है. 



अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे


हमारे शरीर की ७२,७२,१०,२१० सुक्ष्मादी सुक्ष्म नाडी शुद्ध हो जाती है।
हार्ट के ब्लाँकेज खुल जाते है।
उच्च और निम्न दोनों रक्त चाप ठिक हो जायेंगे|
आर्थराटीस, रोमेटोर आर्थराटीस, कार्टीलेज घिसना ऐसी बीमारीओंको ठीक हो जाती है।
टेढे लीगामेंटस सीधे हो जायेंगे|
व्हेरीकोज व्हेनस ठीक हो जाती है।
कोलेस्टाँल, टाँक्सीनस, आँस्कीडण्टस इसके जैसे विजतीय पदार्थ शरीर के बहार नीकल जाते है।
सायकीक पेंशनट्स को फायदा होता है।
किडनी प्राकृतिक रूप से स्वच्छ होती है, डायलेसीस करने की जरुरत नहीं पडती|
सबसे बड़ा खतरनाक कैंसर तक ठीक हो जाता है।
सभी प्रकारकी अँलार्जीयाँ मिट जाती है।
मेमरी बढाने की लीये|
सर्दी, खाँसी, नाक, गला ठीक हो जाता है।
ब्रेन ट्युमर भी ठीक हो जाता है।
सभी प्रकार के चर्म समस्या मिट जाती है।
मस्तिषक के सम्बधित सभि व्याधिओको मिटा ने के लिये।
पर्किनसन, प्यारालेसिस, लुलापन इत्यादी स्नयुओ के सम्बधित सभि व्याधिओको मिटा ने के लिये।
सायनस की व्याधि मिट जाती है।
डायबीटीस पुरी तरह मिट जाती है।
टाँन्सीलस की व्याधि मिट जाती है।
थण्डी और गरम हवा के उपयोग से हमारे शरीर का तापमान संतुलित रेहता है।
इससे हमारी रोग-प्रतिकारक शक्ती बढ जाती है।
अनुलोम विलोम के करने से कोई भी एलर्जी जड़ से खत्म हो जाती है।


अनुलोम विलोम प्राणायाम :सावधानियां

सास लेते समय अपना ध्यान दोनो आँखो के बीच में स्थित आज्ञा चक्र पर ध्यान एकत्रित करना चाहिए।
बायी नाडी को चन्द्र (इडा, गन्गा) नाडी, और दायी नाडी को सूर्य (पीन्गला, यमुना) नाडी केहते है।
चन्द्र नाडी से थण्डी हवा अन्दर जती है और सूर्य नाडी से गरम नाडी हवा अन्दर जती है।
कमजोर और एनीमिया से पीड़ित रोगी इस प्राणायाम के दौरान सांस भरने और सांस निकालने (रेचक) की गिनती को क्रमश: चार-चार ही रखें। अर्थात चार गिनती में सांस का भरना तो चार गिनती में ही सांस को बाहर निकालना है।
स्वस्थ रोगी धीरे-धीरे यथाशक्ति पूरक-रेचक की संख्या बढ़ा सकते है।
कुछ लोग समयाभाव के कारण सांस भरने और सांस निकालने का अनुपात 1:2 नहीं रखते। वे बहुत तेजी से और जल्दी-जल्दी सांस भरते और निकालते है। इससे वातावरण में व्याप्त धूल, धुआं, जीवाणु और वायरस, सांस नली में पहुंचकर अनेक प्रकार के संक्रमण को पैदा कर सकते है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते समय यदि नासिका के सामने आटे जैसी महीन वस्तु रख दी जाए, तो पूरक व रेचक करते समय वह न अंदर जाए और न अपने स्थान से उड़े। अर्थात सांस की गति इतनी सहज होनी चाहिए कि इस प्राणायाम को करते समय स्वयं को भी आवाज न सुनायी पड़े।

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