Pashupat Astra Stotra पशुपतास्त्र स्तोत्र

 पशुपतास्त्र स्तोत्र

जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलवाता है  पशुपतास्त्र स्तोत्र | इस पाशुपतास्त्र स्तोत्र का मात्र 1 बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है। 100 बार जप करने पर समस्त उत्पातों को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय

Pashupat Astra Stotra

प्राप्त कर सकता है। इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवन करने से मनुष्य असाध्य कार्यों को पूर्ण कर सकता है ।

 

यह स्तोत्रा अग्नि पुराण के 322 वें अधयाय से लिया गया है। यह अत्यन्त प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी प्रयोग है। यदि मनुष्य इस स्तोत्र का पाठ करे तो अवश्य फायदा मिलेगा। शनिदेव शिव भक्त भी हैं और शिव के शिष्य भी हैं। शनि के गुरु शिव होने के कारण इस अमोघ प्रयोग का प्रभाव और अधिाक बढ़ जाता है। यदि किसी साधारण व्यक्ति के भी गुरु की कोई आवभगत करें तो वह कितना प्रसन्न होता है। फिर शनिदेव अपने गुरु की उपासना से क्यों नहीं प्रसन्न होंगे। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और शिव की प्रसन्नता से शनिदेव खुश होकर संबंधित व्यक्ति को अनुकूल फल प्रदान करते हैं।

 

जैसा कि इसका नाम अमोघ प्रयोग है, उसी प्रकार यह किसी भी कार्य के लिए अमोघ राम बाण है। जिस वर या कन्या के विवाह में विलंब होता है, यदि इस पाशुपत-स्तोत्रा का प्रयोग जैसा कि बताया गया है 1008 की संख्या में पाठ करने के बाद दशांश, हवन, तर्पण एवं मार्जन कर यथा शक्ति ब्राह्मण भोजन कराकर पूर्णाहुति करें तो निश्चित रूप से शीघ्र ही उन्हें दाम्पत्य सुख का लाभ मिलता है। केवल इतना ही नहीं, अन्य सांसारिक कष्टों को दूर करने के लिए भी 1008 पाठ या जप, हवन, तर्पण, मार्जन आदि करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

 

पशुपतास्त्र मंत्र पाठ

 

पाशुपतास्त्र स्त्राोत का 21 दिन नियमित सुबह-शाम 21-21 पाठ प्रतिदिन करें। साथ ही नीचे लिखे स्तोत्र का एक सौ आठ बार अवश्य जाप करें और सुबह या शाम को इस मंत्र की 51 आहुतियां काले तिल से हवन अवश्य करें।

 

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है ।

 

सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त के सकता है ।

 

इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है ।

 

इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

 

 पशुपतास्त्र स्तोत्र

 

ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुलबलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे ।

 

ॐ कृष्णपिंग्डलाय फट । हूंकारास्त्राय फट । वज्र हस्ताय फट ।

शक्तये फट । दण्डाय फट । यमाय फट । खडगाय फट । 

नैऋताय फट । वरुणाय फट । वज्राय फट । पाशाय फट । 

ध्वजाय फट । अंकुशाय फट । गदायै फट । कुबेराय फट । 

त्रिशूलाय फट । मुदगराय फट । चक्राय फट । पद्माय फट । 

नागास्त्राय फट । ईशानाय फट । खेटकास्त्राय फट ।

मुण्डाय फट । मुण्डास्त्राय फट । काड्कालास्त्राय फट । 

पिच्छिकास्त्राय फट । क्षुरिकास्त्राय फट । ब्रह्मास्त्राय फट ।

 शक्त्यस्त्राय फट । गणास्त्राय फट । सिध्दास्त्राय फट । 

पिलिपिच्छास्त्राय फट । गंधर्वास्त्राय फट । पूर्वास्त्रायै फट । 

दक्षिणास्त्राय फट । वामास्त्राय फट । पश्चिमास्त्राय फट ।

 मंत्रास्त्राय फट । शाकिन्यास्त्राय फट । योगिन्यस्त्राय फट । 

दण्डास्त्राय फट । महादण्डास्त्राय फट । नमोअस्त्राय फट । 

शिवास्त्राय फट । ईशानास्त्राय फट । पुरुषास्त्राय फट । 

अघोरास्त्राय फट । सद्योजातास्त्राय फट । हृदयास्त्राय फट । 

महास्त्राय फट । गरुडास्त्राय फट । राक्षसास्त्राय फट । 

दानवास्त्राय फट । क्षौ नरसिन्हास्त्राय फट । त्वष्ट्रास्त्राय फट । 

सर्वास्त्राय फट ।

नः फट । वः फट । पः फट । फः फट । मः फट ।

श्रीः फट । पेः फट । भूः फट । भुवः फट । स्वः फट ।

महः फट । जनः फट । तपः फट ।

सत्यं फट । सर्वलोक फट । सर्वपाताल फट ।

सर्वतत्व फट । सर्वप्राण फट । सर्वनाड़ी फट ।

सर्वकारण फट । सर्वदेव फट । ह्रीं फट । श्रीं फट ।

डूं फट । स्त्रुं फट । स्वां फट । लां फट ।

वैराग्याय फट । मायास्त्राय फट ।

कामास्त्राय फट । क्षेत्रपालास्त्राय फट ।

हुंकरास्त्राय फट । भास्करास्त्राय फट ।

चंद्रास्त्राय फट । विघ्नेश्वरास्त्राय फट ।

 गौः गां फट । स्त्रों स्त्रौं फट । हौं हों फट ।

भ्रामय भ्रामय फट । संतापय संतापय फट । छादय छादय फट ।

उन्मूलय उन्मूलय फट । त्रासय त्रासय फट । संजीवय संजीवय फट ।

विद्रावय विद्रावय फट । सर्वदुरितं नाशय नाशय फट ।

Lakshmi Vastu Totke


लक्ष्मी Wealth प्राप्ति के लिए  वास्तु Totke

 

लक्ष्मी Wealth प्राप्ति के लिए  वास्तु Totke

1-लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पूर्व दिशा -: 

यहां घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमें बढ़ोतरी होती रहती है।


2- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पश्चिम दिशा -: 

यहां धन-संपत्ति और आभूषण रखे जाएं तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है ।

3- उत्तर दिशा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए -: 

घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते हैं, वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए। इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी।


4- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दक्षिण दिशा -: 

इस दिशा में धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परंतु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है।


5- ईशान कोण लक्ष्मी प्राप्ति के लिए -: 

यहां पैसा, धन और आभूषण रखे जाएं तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुद्धिमान है और यदि यह उत्तर ईशान में रखे हों तो घर की एक कन्या संतान और यदि पूर्व ईशान में रखे हों तो एक पुत्र संतान बहुत बुद्धिमान और प्रसिद्ध होता है ।


6- सीढ़ियों के नीचे तिजोरी रखना शुभ नहीं होता है। सीढ़ियों या टायलेट के सामने भी तिजोरी नहीं रखना चाहिए। तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या मकड़ी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।


7- घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।